भारत और UAE के रिश्ते अब सिर्फ दोस्ती और कूटनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ रहा है। सबसे बड़ी खबर यह है कि India-UAE bilateral trade FY 2025-26 में करीब $101.25 billion तक पहुंच गया है। अब दोनों देशों ने इसे 2032 तक $200 billion तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2022 में लागू हुए Comprehensive Economic Partnership Agreement यानी CEPA के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिली। अब अगला फोकस सिर्फ ज्यादा सामान बेचने पर नहीं, बल्कि technology, investment, energy और नए business sectors में साझेदारी बढ़ाने पर है।
$100 Billion का आंकड़ा कैसे पार हुआ?
भारत और UAE के बीच व्यापार लंबे समय से होता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें काफी तेजी आई है। FY 2024-25 में bilateral trade पहली बार $100.06 billion के पार पहुंचा था और FY 2025-26 में यह करीब $101.25 billion हो गया। UAE अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा trading partner और भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा export destination है। इस व्यापार में petroleum products, gems and jewellery, food products, textiles, chemicals, electronics और engineering goods जैसी कई categories शामिल हैं। यानी दोनों देशों का व्यापार अब किसी एक product या sector पर निर्भर नहीं है।
CEPA ने बदल दी भारत-UAE Trade की तस्वीर
भारत और UAE के बीच CEPA 2022 में हुआ था और इसका मकसद दोनों देशों के बीच goods और services के व्यापार को आसान बनाना था। इसके बाद कई products को बेहतर market access मिला और tariffs में भी बदलाव आया। इसका असर भारत के exports पर भी दिखाई दिया। Government data के अनुसार FY 2023-24 में UAE को भारत के non-oil exports $27.4 billion तक पहुंच गए थे। Smartphones, electrical equipment, machinery और chemicals जैसे products ने भी UAE market में अपनी जगह बनाई है।
अब $200 Billion का Target क्यों रखा गया है?
जनवरी 2026 में UAE के President Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने bilateral trade को 2032 तक $200 billion तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में दोनों देश सिर्फ मौजूदा व्यापार को बढ़ाने के बजाय नए sectors में भी बड़े अवसर तलाशेंगे। खास तौर पर MSMEs को दोनों देशों के markets से जोड़ने, नए trade routes और digital systems विकसित करने और investment को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
UAE भारत में कितना बड़ा निवेश कर रहा है?
व्यापार के साथ UAE भारत में एक महत्वपूर्ण investor भी बन चुका है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक UAE से भारत में cumulative FDI करीब $25.59 billion पहुंच गया। UAE का investment real estate, infrastructure, energy, private equity और financial services जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है। Abu Dhabi Investment Authority जैसे sovereign wealth funds भी भारत में मौजूद हैं। इससे साफ है कि UAE और भारत का रिश्ता सिर्फ import-export तक सीमित नहीं है, बल्कि अब दोनों देशों की कंपनियां और investment institutions भारत की long-term growth में पैसा लगा रहे हैं।
Dholera में UAE की नजर क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत और UAE के बीच गुजरात के Dholera Special Investment Region को लेकर भी सहयोग की संभावना बढ़ी है। दोनों देशों ने यहां airport, MRO facility, port, smart township, railway connectivity और energy infrastructure जैसे क्षेत्रों में संभावित partnership पर चर्चा की है। अगर ऐसे projects आगे बढ़ते हैं तो इससे infrastructure के साथ manufacturing, logistics, aviation और technology से जुड़े कई businesses को फायदा मिल सकता है। यानी UAE का investment सिर्फ पैसा लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के industrial infrastructure को मजबूत करने में भी भूमिका निभा सकता है।
Energy में भारत-UAE की दोस्ती और मजबूत हो रही है
भारत के लिए energy security बेहद महत्वपूर्ण है और UAE इस क्षेत्र में एक बड़ा partner है। दोनों देशों ने लंबे समय के LNG और LPG supply agreements पर भी काम किया है। जनवरी 2026 में HPCL और ADNOC Gas के बीच 10-year LNG supply agreement का स्वागत किया गया, जिसके तहत 2028 से हर साल 0.5 million tonnes LNG की supply की योजना है। इसके अलावा crude oil storage और strategic petroleum reserves को लेकर भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है। इससे भारत को long-term energy supply को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
AI और Technology में भी बन रही नई Partnership
भारत और UAE अब आने वाले समय की technology पर भी साथ काम कर रहे हैं। दोनों देशों ने Artificial Intelligence और emerging technologies में cooperation बढ़ाने पर सहमति जताई है। भारत में एक बड़े supercomputing cluster को लेकर भी partnership सामने आई है। जून 2026 में भारत के UAE संबंधों पर जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार C-DAC और UAE की G42 के बीच 8 Exaflop supercomputing cluster स्थापित करने के लिए सहयोग की योजना भी बताई गई। इसका असर AI research, data processing, startups और advanced technology ecosystem पर पड़ सकता है।
UPI और UAE के Payment System का Connection
दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए digital payments पर भी काम हो रहा है। भारत और UAE अपने instant payment platforms को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे भविष्य में दोनों देशों के बीच cross-border payments ज्यादा आसान और तेज हो सकते हैं। इसके साथ ही RuPay और UAE के JAYWAN domestic debit card systems को interlink करने की दिशा में भी काम चल रहा है। अगर ये systems बड़े स्तर पर इस्तेमाल होते हैं तो tourists, workers और businesses के लिए छोटे-बड़े payments करना ज्यादा आसान हो सकता है।
MSMEs के लिए खुल सकता है बड़ा Market
भारत और UAE ने छोटे और मध्यम businesses यानी MSMEs को एक-दूसरे के markets से जोड़ने पर भी खास जोर दिया है। Bharat Mart, Virtual Trade Corridor और Bharat-Africa Setu जैसे initiatives का उद्देश्य भारतीय products को UAE और उसके आसपास के बड़े markets तक पहुंचाने में मदद करना है। इसका फायदा केवल बड़ी कंपनियों को नहीं मिल सकता। अगर सही तरीके से implementation होता है तो छोटे manufacturers, food businesses, textile companies, handicraft sellers और engineering product makers को भी export के नए अवसर मिल सकते हैं।
भारत के किन Products की Demand UAE में बढ़ सकती है?
भारत UAE को पहले से ही कई तरह के products export करता है और आने वाले समय में इस basket को और बड़ा करने की कोशिश हो सकती है। Engineering goods, electronics, food products, chemicals, textiles और processed products जैसे sectors में opportunities मौजूद हैं। CEPA के बाद market access बेहतर होने से भारतीय exporters के लिए UAE एक महत्वपूर्ण gateway बन गया है। UAE की खासियत यह भी है कि वह सिर्फ खुद का market नहीं है; Dubai और दूसरे व्यापारिक hubs के जरिए कई products Middle East, Africa और आसपास के markets तक पहुंच सकते हैं।
UAE के लिए भारत इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत UAE के लिए भी एक बड़ा market और investment destination है। भारत की बड़ी population, growing consumer market, manufacturing capacity और तेजी से बढ़ती digital economy UAE investors के लिए आकर्षक हैं। दूसरी तरफ UAE के पास capital, global logistics network और Middle East तथा Africa के markets से मजबूत connections हैं। यही combination दोनों देशों के लिए खास है। भारत production और talent दे सकता है, जबकि UAE investment और international market connectivity में मदद कर सकता है। इसी वजह से दोनों देशों का economic relationship आने वाले वर्षों में और गहरा हो सकता है।
IMEC से बदल सकता है Trade का रास्ता
India-Middle East-Europe Economic Corridor यानी IMEC भी भारत-UAE economic relationship के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका उद्देश्य भारत, Middle East और Europe के बीच commerce और energy flows को बेहतर बनाना है। भारत और UAE ने जनवरी 2026 में भी IMEC के प्रति अपनी commitment दोहराई। अगर इसके infrastructure और connectivity projects आगे बढ़ते हैं तो future में goods को नए और ज्यादा efficient routes से Middle East और Europe तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इससे logistics और supply chain के क्षेत्र में भी नए opportunities बन सकती हैं।
क्या यह China के लिए बड़ी चुनौती है?
भारत और UAE के बढ़ते रिश्तों को सीधे तौर पर China के खिलाफ alliance कहना सही नहीं होगा, क्योंकि दोनों देश अपने economic और strategic interests के आधार पर partnerships बढ़ा रहे हैं। लेकिन इतना जरूर है कि India-UAE trade, investment, energy और connectivity का मजबूत होना Middle East में भारत की economic presence को बढ़ाता है। UAE पहले से ही एक बड़ा global trading hub है और भारत के साथ उसके संबंध जितने मजबूत होंगे, भारत को Gulf और broader Middle East markets में उतने ज्यादा economic connections मिल सकते हैं। इसलिए इसका geopolitical असर भी हो सकता है।
Pakistan के लिए इसका क्या मतलब है?
भारत-UAE के बढ़ते economic relations का असर Pakistan पर भी indirect रूप से पड़ सकता है, खासकर तब जब भारत Middle East में अपने trade, investment और connectivity links लगातार मजबूत करता है। लेकिन इसे भारत-Pakistan competition के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। UAE के लिए भारत एक बहुत बड़ा trading और investment partner है और दोनों देशों के रिश्ते कई अलग-अलग sectors पर आधारित हैं। इसलिए इस partnership का मुख्य उद्देश्य economic growth और mutual benefit है, न कि किसी तीसरे देश को target करना।
अब अगला बड़ा दांव $200 Billion है
$100 billion पार करना इस partnership का अंत नहीं बल्कि एक नया stage है। अब दोनों देशों के सामने असली challenge यह है कि trade को अगले स्तर तक कैसे ले जाया जाए। इसके लिए ज्यादा Indian products को UAE market में पहुंचाना, services exports बढ़ाना, investment बढ़ाना, MSMEs को जोड़ना, logistics बेहतर करना और technology cooperation को मजबूत करना होगा। दोनों देशों ने 2032 तक $200 billion का लक्ष्य रखा है, इसलिए आने वाले वर्षों में इस partnership में कई नए agreements और business opportunities देखने को मिल सकती हैं।
भारत और UAE की partnership अब एक ऐसी economic partnership बन चुकी है जिसमें trade, investment, energy, technology, finance, infrastructure और security सभी शामिल हैं। $100 billion का trade आंकड़ा इस बदलाव का बड़ा संकेत है, लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण अब रखा गया $200 billion का लक्ष्य है। अगर दोनों देश CEPA का बेहतर इस्तेमाल करते हैं, MSMEs को जोड़ते हैं और technology तथा infrastructure projects को तेजी से आगे बढ़ाते हैं, तो भारत-UAE economic relationship आने वाले वर्षों में और बड़ा हो सकता है। इस कहानी का असली अगला chapter अब $200 billion trade target और उसके लिए तैयार हो रही नई business strategy होगी।













