किसी भी उद्योग के सफलतापूर्वक संचालन के लिए आवश्यक होता है। योग्यता, कुशल कर्मचारी, पर्याप्त साधन तथा संगठन जिसके अंतर्गत व्यवसाय की गतिविधियां संचालित की जाती है।
स्वामित्व के आधार पर व्यवसाय को निम्न वर्गों में बांटा गया हैः
1एकल स्वामित्व
2भागीदारी
3सीमित दायित्व वाली कम्पनी
4सहकारी संस्थाएं
5विशेष विक्रय अधिकार
एकल स्वामित्व
एकल स्वामित्व एक मात्रा व्यापारी के रूप में जाना जाता है। स्वामित्व एक व्यापारिक इकाई का प्रकार है, जो एक व्यक्ति द्वारा चलाया जाता है। एकल स्वामित्व में मालिक और व्यापार में कोई कानूनी अंतर नहीं होता है।
एकल स्वामित्व में उद्यमी स्वयं सभी लाभ प्राप्त करता है तथा सभी घाटे और कर्ज के लिए भी जिम्मेदार होता है। व्यवसाय की प्रत्येक सम्पत्ति तथा ऋण उद्यमी/स्वामित्व के होते हैं। एकल स्वामित्व के अंतर्गत उद्यमी अपने कानूनी नाम के अलावा व्यवसाय के नाम का उपयोग कर सकते हैं।
लाभ
•छोटे स्तर पर उद्यम/व्यवसाय शुरू करना आसान होता है।
•व्यवसाय शुरू करने तथा चलाने के लिए छोटी मात्रा में पूंजी आवश्यक है।
•अपने स्वयं के दिशा निदेशों पर इच्छानुसार उद्यम व्यापार चला सकते हैं।
•कर निर्धारण की दृष्टि से आय के विरुद्ध कुछ व्यापारिक खर्च दिखाए जा सकते हैं।
•उद्यम व्यापार का कोई भी पहलू सार्वजनिक नहीं होता।
•यदि एक से अधिक उद्यम व्यापार करते हैं तो एक उद्यम व्यापार का घाटा दूसरे उद्यम व्यापार के मुनापेफ से घटाया जा सकता है। उद्यमी व्यापार के सभी लाभ स्वयं प्राप्त कर सकता है।