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सरकार की मदद से शुरू करें अपना बिज़नेस. लघु उद्योगों को भारत सरकर की मदद


लघु उद्योगों की सहायता और विकास के लिए सरकार की सहायक संस्थाएँ 

सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र पिछले पांच दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था के एक बेहद जीवंत और गतिशील क्षेत्र के रूप में उभरा है। एमएसएमई न केवल बड़े उद्योगों की तुलना में अपेक्षाकृत कम पूंजी लागत पर बड़े रोजगार के अवसर प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैंए बल्कि यह ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगीकरण में मदद भी करते हैं जिससे क्षेत्रीय असंन्तुलन काम होता है और राष्ट्रीय आय और धन का अधिक समान वितरण आश्वस्त होता है। एमएसएमई सहायक इकाइयों के रूप में बड़े उद्योगों के पूरक हैं और यह क्षेत्र के देश के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए काफी योगदान देता है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय (एम/ओ एमएसएमई) की कल्पना एक जीवंत एमएसएमई क्षेत्र है जहाँ संबंधित मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के सहयोग से एमएसएमई सेक्टर के मौजूदा उद्यमों जैसे खादी, ग्रामीण और कॉयर उद्योग को समर्थन, और नए उद्यमों के सृजन को प्रोत्साहन मिले।


लघु उद्योग स्थापनार्थ सहायक संस्थायें

भारत में लघु उद्योगों के विकास तथा इन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए अनेक संगठन स्थापित किए गए हैं। इनमें से प्रमुख संगठन इस प्रकार हैं:

•राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड 1955 में भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक उपक्रम है। यह भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत आता है। यह देश में सूक्षम और स्मॉल्स स्तर के उद्योगों और उद्यमों को बढ़ावा देने और विकसित करने के लिए स्थापित किया गया था। यह मूल रूप से एक भारतीय सरकारी एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था। जो बाद में पूर्ण स्वामित्व वाली सरकार निगम में परिवर्तित हो गया। भारत के छोटे और उभरते उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने सरकारी एजेंसी की स्थापना करने का निर्णय लिया जो लघु उद्योगों को सहायता प्रदान कर सकते हैं।

उद्देश्य 

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम किराया खरीद आधार पर मशीनरी उपलब्ध कराने और निर्यात में विपणन और सहायता के उद्देश्य से स्थापित किया गया। एनएसीआईसी कच्चे माल जैसे कोयले, लोहा, स्टील और अन्य सामग्री की आपूर्ति के आयोजन में मदद करता है। और जो इस सामग्री का उत्पादन करते हैं लघु उद्योगों को रियायती दरों पर ही उपलब्ध कराते हैं।


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